कबड्डी की उत्पत्ति और भारत में विकास
कबड्डी का उल्लेख महाभारत काल की कथाओं में मिलता है, जब अभिमन्यु ने शत्रु-घेरे में अकेले संघर्ष किया था — यही सांस लेकर वापस लौटने की चुनौती इस खेल की आत्मा है। ग्रामीण भारत में यह खेल पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिट्टी के मैदानों में खेला जाता रहा। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय दल ने इसे प्रदर्शनी खेल के रूप में दुनिया को दिखाया।
1950 में अखिल भारतीय कबड्डी संघ की स्थापना ने इसे संगठित रूप दिया। आज Pro Kabaddi League ने इसे करोड़ों दर्शकों तक पहुंचाया है।